पूरी रात अंधेरे में रही 33 हजार आबादी

विभिन्न गड़बड़ियों के चलते लगभग 33 हजार आबादी की विद्युत आपूर्ति 20 घंटे से अधिक समय से ठप पड़ी हुई है। कहीं सोमवार आधी रात से तो कहीं मंगलवार भोर से बिजली नदारद है। आपूर्ति देर शाम तक बहाल नहीं हो पाई थी। इससे हजारों उपभोक्ताओं को विभिन्न मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक समस्या पेयजल को लेकर रही।electricity_1468604214
 प्रभावित लोगों का कहना था कि जब अभी यह हाल है तो गर्मी में तो मुश्किलें और ज्यादा विकराल होकर सामने आएंगी। गर्मी की आहट अभी ठीक से सुनाई भी नहीं पड़ी कि बिजली संकट का दौर शुरू हो चुका है। पावर कारपोरेशन के तमाम दावों व वादों के बावजूद उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। इसका मुख्य कारण जर्जर हो चुके उपकरणों का न बदला जाना है।न सिर्फ कई क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर ओवरलोड चल रहे हैं बल्कि बिजली के तार व खंभे भी बुरी तरह जर्जर हो गए हैं। ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाए जाने व जर्जर उपकरणों को बदले जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नतीजतन इसका खामियाजा आमतौर पर उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ रहा है।

सोमवार लगभग आधी रात से मंगलवार देर शाम कटेहरी,  जलालपुर, बेवाना व मालीपुर क्षेत्र के 150 से अधिक गांवों के उपभोक्ताओं को तकनीकी गड़बड़ी के चलते सुचारु बिजली नहीं मिल सकी। इससे लगभग 33 हजार आबादी प्रभावित हुई।

 महरुआ फीडर से जुड़े आदमपुर तिंदौली, किशुनीपुर सरखने, पांती, मंथापुर, बरामदपुर जरियारी, सारंगपुर समेत लगभग 20 गांवों की आपूर्ति फीडर में आई तकनीकी खराबी के चलते रविवार देर रात्रि ठप हो गई। मंगलवार देर शाम तक आपूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई थी।

जलालपुर के सुरहुरपुर क्षेत्र में एक पिकअप द्वारा विद्युत पोल को क्षतिग्रस्त कर दिए जाने व तार टूटने से सोमवार आधी रात से विद्युत आपूर्ति ठप पड़ गई। लगभग आठ हजार आबादी इससे प्रभावित हुई। यहां मंगलवार शाम तक उपभोक्ताओं को बिजली मिल नहीं पाई थी।

इसी प्रकार बेवाना व मालीपुर क्षेत्र में कहीं जर्जर तार टूटने तो कहीं फीडर में आई खराबी के चलते सोमवार देर शाम से मंगलवार शाम तक बिजली आपूर्ति का संकट बना रहा। नतीजा यह रहा कि संबंधित क्षेत्र के उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक समस्या पेयजल को लेकर उत्पन्न हुई।

जो लोग टुल्लू पंप के सहारे थे, उन्हें एक-एक बाल्टी पानी के लिए घर के बाहर लगे हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ा। महरुआ के लालजी व संतोष ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक जर्जर हो चुके उपकरणों को नहीं बदला जाता, सुचारु बिजली नहीं मिल सकती। इसे देखते हुए पावर कारपोरेशन को तत्काल ठोस कदम उठाते हुए जर्जर उपकरणों को बदलवाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

मालीपुर के छोटेलाल व मोहम्मद अनीस ने कहा कि सिर्फ दावा करने से कुछ होने वाला नहीं है। इसके लिए पावर कारपोरेशन को ठोस कदम उठाना होगा। बेवाना के शंखलाल व रामसमुझ ने कहा कि जर्जर उपकरणों को न सिर्फ अविलंब बदला जाए, बल्कि ओवरलोडेड चल रहे ट्रॉसफार्मरों की क्षमता भी बढ़ाई जाए।

 पावर कार्पोरेशन के अधिशाषी अभियंता मुकेश बाबू ने बताया कि जो बिजली मिल रही है, उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जा रही है। कई क्षेत्रों में जर्जर उपकरणों को बदला जा चुका है तो कई क्षेत्रों में कार्य चल रहा है। कई जगहों पर आई गड़बड़ियों को दुरुस्त करा दिया गया है।