स्क्रैप को लेकर प्रबंधन-श्रमिकों में विवाद

गौरीबाजार। पिछले 21 वर्ष से बंद पड़ी गौरीबाजार चीनी मिल में सामान उठाने को लेकर शनिवार को मिल प्रबंधन और मिल कर्मचारियों में विवाद की स्थिति हो गई। सूचना के बाद एसडीएम सदर कई थानों की फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। थाने में समझौता हुआ। इसमें सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक प्रतिदिन एक ट्रक स्क्रैप निकलेगा। इसकी वीडियोग्राफी होगी और तौल की रसीद प्रशासन को देना होगा।_1486835064
 
ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन की कानपुर शुगर वर्क्स के अधीन वर्ष 1914 से गौरीबाजार चीनी मिल चल रही थी। 80 के दशक में बीमार घोषित कर इसे बीआईएफआर के हवाले कर दिया गया। आठ मार्च 1996 को इसे बंद कर दिया गया। 2011 में राजेंद्र इस्पात प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता ने 17.20 करोड़ रुपये में खरीद लिया।

नये प्रबंधक यहां से सामान और कबाड़ बेचना चाहते थे। कई बार प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिली। मिल के कर्मचारी और गन्ना किसान इसका विरोध कर रहे थे। मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में मुकदमे की तारीख है। कुछ दिन पूर्व मिल प्रबंधन के लोग स्क्रैप निकलवाने आए तो श्रमिकों ने उन्हें दौड़ा लिया था।

मिल प्रबंधन ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की थी। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट से उनके पक्ष में आदेश हुआ। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को एसडीएम सदर सचिन सिंह कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे। मिल कर्मचारियों, किसानों, मिल प्रबंधन और प्रशासन के बीच वार्ता हुई। मिल श्रमिक कन्हैया यादव, जीउत यादव, रमाशंकर सिंह, मुकुल सिंह, चंडीलाल जायसवाल, रामसकल यादव का कहना था कि उनका 24 करोड़ रुपये बकाया है।

जबकि किसानों का कहना था कि 1.62 करोड़ रुपये उनका गन्ना मूल्य बाकी है। जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता है, वे लोग यहां से स्क्रैप नहीं उठने देंगे। अंत में इस बात पर समझौता हुआ कि प्रतिदिन एक ट्रक स्क्रैप चीनी मिल से निकलेगा। इसकी वीडियोग्राफी कराई जाएगी। तौल कराकर मिल प्रबंधन के लोग प्रतिदिन रसीद जिला प्रशासन को देंगे। गौरीबाजार के इंस्पेक्टर डीपी सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है।