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वैॆश्य समाज के लोगों को इसलिए हाथ लग जाता है ‘कुबेर का खजाना’!

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पैसे को सूंघ लेने की क्षमता

भारत में आमतौर पर वैश्य समाज के लोग व्यापार जगत पर हावी रहते हैं। वे जिस भी धंधे में हाथ लगाते हैं उन्हें तरक्की हासिल होती है। आइये आगे जानते हैं ऐसा क्या होता है उनमें जो उन्हें बाकियों से अलग बनाता है।

पारंपरा से उद्यमी
वैश्य समाज को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है। पहला पारंपरिक उद्यमी और दूसरा उत्तर और पश्चिम में ट्रेड करने वाला वैश्य समाज। फोर्ब्स की भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में टॉप 10 में से आठ वैश्य समाज से ही हैं

मित्तल से अंबानी तक
लक्ष्मी मित्तल के बाद वैश्य समाज से दुनिया में सबसे अमीर भारतीय मुकेश अंबानी हैं। उनके अलावा शशि और रवि रुइया, सावित्री जिंदल, गौतम अडाणी, कुमार मंगलम बिड़ला, अनिल अंबानी और सुनील मित्तल भी वैश्य समाज से ही हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत की जनसंख्या में इनकी आबादी सिर्फ एक प्रतिशत है।

जीन में है बिजनस
Flipkart.com की शुरुआत 2007 में सचिन और बिन्नी बंसल के द्वारा की गई थी। 2015 में यह कंपनी 10,000 करोड़ के रेवेन्यू के साथ भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर कंपनी बन गई। Snapdeal.com के संस्थापक रोहित बंसल भी एक बिजनस परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता एक अनाज व्यापारी थे और उनके चाचा ट्रेडर।

जोखिम उठाने की क्षमता
वैश्य समाज के लोग काफी छोटी उम्र से ही जोखिम उठाने की क्षमताओं को सीखना शुरू कर देते हैं। इलाहाबाद में जन्मे व्यापारी मनमोहन अग्रवाल ने सिर्फ 15 साल में ही अपने दम पर काम शुरू कर दिया था। वह कहते हैं, ‘मेरे पिता ने मेरे भीतर साहसिक निर्णय लेने की क्षमता भर दी थी। उन्होंने बताया था कि जो भी काम करो उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करो।’ मनमोहन अग्रवाल ने आठ साल तक छोटे-मोटे धंधे में लगे रहे उसके बाद उन्होंने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म

हिसाब-किताब रखने में महारथ
वैश्य समाज के लोगों को अक्सर बनिया भी कहा जाता है जो संस्कृत के वाणिज्य शब्द से बना है जिसका मतलब होता है कॉमर्स या व्यापार। बनिया अपने बही खातों के लेखा-जोखा को एकदम दुरुस्त रखते हैं। उनके खातों में गड़बड़ी की संभावना बिल्कुल न के बराबर होती है।

पैसे को सूंघ लेने की क्षमता
व्यापार करने में माहिर लोग कभी भी पैसा कमाने का अवसर जाने नहीं देते। वे 24 घंटे सिर्फ पैसा कमाने के बारे में सोचते हैं इसके लिए चाहे उन्हें अपना सामाजिक जीवन त्यागना पड़ जाए।

हर क्षेत्र में बुलंदी
व्यापार के अलावा वे जिस भी क्षेत्र में कदम रखते हैं उसमें अपना दम दिखा देते हैं। भारत के शीर्ष नेताओं की बात करें तो नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल भी वैश्य समाज से ताल्लुक रखते हैं।