467 खनन कारोबारियों को मिली राहत, एनजीटी ने अगली सुनवाई तक जुर्माना वसूली पर लगाई रोक

दुमका और पाकुड़ जिला में अवैध रुप से पत्थर खनन से पर्यावरण को हुए नुकसान में खनन कारोबारियों पर लगाए गए जुर्माना मामले में एनजीटी की कोलकाता बेंच ने अगली सुनवाई तक के लिए रोक लगा दिया है। रामचंद्र मार्डी बनाम वेस्ट बंगाल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड एवं अन्य मामला (ओए नंबर 127/2015/ईजेड) में दायर इंटरलोकेटरी पीटीशन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ईस्टर्न जोन बेंच कोलकाता में 22 जून को सुनवाई हुई थी। जुडिशियल मेंबर जस्टीस बी अमित स्थेलकर और एक्सपर्ट मेंबर सैबाल दासगुप्ता ने सुनवाई की थी। सुनवाई के बाद अपने आदेश में एनजीटी के कोलकाता बेंच ने इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (आईसीएफआरई) देहरादून को भी पार्टी मानते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। 

467 खनन कारोबारियों पर लगा है 1138 करोड़ का जुर्माना
बता दें कि आईसीएफआरई की रिपोर्ट के आधार पर ही एनजीटी के आदेश के बाद वर्ष 2020 में दुमका और पाकुड़ के 467 खनन कारोबारियों के विरुद्ध करीब 1138 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है जिसकी वसूली के लिए दुमका के 217 और पाकुड़ के 250 खनन कारोबारियों को खनन विभाग द्वारा नोटिस भेजा गया है।

नोटिस के विरुद्ध दुमका के खनन व्यवसायी सरोज कुमार भगत और पाकुड़ के मेसर्स मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड सहित कई खनन कारोबारियों ने एनजीटी में न्याय की गुहार लगाते हुए इंटरलोकेटरी पीटीशन दायर किया है। 22 जून को हुई सुनवाई के बाद जारी आदेश में आईसीएफआरई देहरादून को नोटिस भेज कर 4 सप्ताह के अंदर शपथ पत्र दायर करने का आदेश दिया गया है। 

साथ ही अगली सुनवाई तक के लिए सरोज कुमार भगत और मेसर्स मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड जुर्माना वसूली पर रोक लगा दी गई है। बता दें कि मेसर्स मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड को अवैध खनन से पर्यावरण को हुई क्षति की पूर्ति के लिए 117.97 लाख का जुर्माना लगाया गया है। 

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी नोटिस
इसके पूर्व 8 जून को सौमित्रा घोष बनाम स्टेट ऑफ झारखंड एंड अदर्स मामले हुई सुनवाई में एनजीटी के कोलकाता बेंच ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस भेजते हुए शपथ पत्र जमा करने का का आदेश दिया था। इस केस की अगली सुनवाई 13 जुलाई है।