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खेलों के विकास के लिए साई ने बर्मिघम विश्वविद्यालय से मिलाया हाथ

 भारतीय खेल प्राधिकरण यानी साई ने देश में खेलों के विकास के लिए खेलों के तकनीकी पहलुओं पर शोध एवं विकास कार्यक्रम चलाने के लिए दुनिया में विख्यात बर्मिघम विश्वविद्यालय से करार किया है।khel-18-inn2

इस समझौते के तहत बर्मिघम विश्वविद्यालय के खेल विशेषज्ञ साई में शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। इसका लाभ भारत में खेल प्रशिक्षकों और खेल वैज्ञानिकों को मिलेगा।

बर्मिघम विश्वविद्यालय के उप-कुलपति रॉबिन मेसन ने एक साक्षात्कार में इस साझेदारी पर विस्तार से जानकारी दी।

बकौल रॉबिन, “भारत सरकार खेल के विकास पर जोर दे रही है और साई की मदद से विश्व खेल जगत में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए निवेश कर रही है।”

उल्लेखनीय है कि बर्मिघम विश्वविद्यालय दुनिया को कई ओलम्पिक पदक विजेता देने के लिए मशहूर है, जिनमें लिली ओस्ले का नाम भी शमिल है। लिली इसी वर्ष रियो ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली ब्रिटिश महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं।

साई के साथ साझेदारी के तहत किए जाने वाले कार्यों पर रॉबिन ने कहा कि वह साई में खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए शिक्षण के अवसरों को बढ़ाने और उनकी मदद के लिए व्यवस्थित कार्यक्रमों के विकास की दिशा में काम करेंगे, जिसका लाभ साई और बर्मिघम विश्वविद्यालय दोनों को होगा।

रॉबिन ने कहा, “हमारा उद्देश्य इन शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए भारत में खेल वैज्ञानिकों और खेल शिक्षकों के स्तर को बेहतर बनाना है। इसके अलावा साई के लिए पाठ्यक्रमों का विकास और रणनीति तैयार कर साई को सुदृढ़ता प्रदान की जाएगी और खेलों के क्षेत्र में शोध कार्यो को बढ़ावा दिया जाएगा।”

रॉबिन से जब पूछा गया कि उनका ध्यान मुख्यत: किन खेलों पर होगा तो उन्होंने कहा, “हम साई के साथ इस पर काम करेंगे कि हमें किन खेलों पर ज्यादा ध्यान देना है। साई के साथ बर्मिघम विश्वविद्यालय की साझेदारी 2012 में एक छोटे से कार्यक्रम से शुरू हुई थी, जो अब एक नया मोड़ ले चुकी है।”

रियो ओलम्पिक में बर्मिघम विश्वविद्यालय को मिली सफलता को देखते हुए भारत से कई खेल शिक्षकों और वैज्ञानिकों ने दो सप्ताह के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए विश्वविद्यालय का दौरा किया।

रोबिन ने बताया कि इस दौरे में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, टेबल टेनिस, हैंडबॉल, जूडो, फुटबाल, बैडमिंटन, मुक्केबाजी, कबड्डी, तैराकी, जिम्नास्टिक्स सहित कई खेलों से जुड़े भारतीय प्रशिक्षक लाभान्वित हुए। इस कार्यक्रम में खेल वैज्ञानिकों ने बायोमेकेनिक्स, औषधि विज्ञान, मनोविज्ञान, शरीर विज्ञान, पोषण विज्ञान और एंथ्रोपोमेट्री के बारे में बताया।

बर्मिघम विश्वविद्यालय और साई के बीच हुई इस साझेदारी से भारत को होने वाले लाभ के बारे में रॉबिन ने कहा, “भारत में खेल के स्तर में सुधार करने के उद्देश्य से साई हमारे साथ साझेदारी का अवसर खोज रही थी और बर्मिघम विश्वविद्यालय के खेल विशेषज्ञों और खेल वैज्ञानिकों के साथ काम करना चाहती थी। साई इस साझेदारी के जरिए खेल में हर स्तर पर सुधार करने के उद्देश्य से प्रशिक्षकों के लिए शिक्षण कार्यक्रम में हमारी मदद चाहती है।”

उन्होंने कहा, “खेल विज्ञान में विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ दुनिया में खास स्थान रखते हैं और खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार के लिए प्रशिक्षकों के साथ नवीनतम वैज्ञानिक खोजों और अनुसंधान पर काम करते हैं। इस साझेदारी के तहत दोनों देश खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और खेल नीतियों की दिशा में दुनिया की नवीनतम खोजों पर संयुक्त रूप से काम करेंगे, जिससे दोनों देशों में खेल के विकास में मदद मिलेगी।”