क्या कांग्रेस में शामिल होकर वरुण गांधी बनेंगे पार्टी के खेवनहार?

कांग्रेस में वरुण गांधी को लेकर चर्चा तेज हो गई है. राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी वरुण को पार्टी में शामिल कराने मे ज्यादा उत्सुक हैं. प्रियंका गांधी चाहती हैं कि वरुण को पार्टी में सीनियर ओहदा मिले. जिसके लिए पार्टी के टॉप नेताओं के साथ मशविरा किया गया है.

पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के बाद वरुण गांधी को नंबर 2 की हैसियत वाली कुर्सी मिल सकती है. हालांकि, कांग्रेस में उपाध्यक्ष का ओहदा वरुण को नहीं मिलने जा रहा है. कांग्रेस में वरुण गांधी को लेकर कोई बयान नहीं देना चाहता. मामला परिवार से जुड़ा है. इसलिए कोई नेता जोखिम नहीं उठाना चाहता. वरुण गांधी बीजेपी के सुल्तानपुर से सांसद है.

वरुण होंगे यूपी में कांग्रेस का चेहरा

वरुण गांधी को लेकर कांग्रेस की रणनीति साफ है. कांग्रेस को लग रहा है कि यूपी में बीजेपी के बहुमत के बाद बीएसपी हाशिए पर है. सिर्फ समाजवादी पार्टी है जो बीजेपी का विकल्प है. ये विकल्प कांग्रेस भी बन सकती है. लेकिन पार्टी के पास कोई चेहरा नहीं है. 2017 के चुनाव में समाजवादी पार्टी से गठबंधन से पहले कांग्रेस को दिल्ली से ले जाकर शीला दीक्षित को सीएम का चेहरा बनाना पड़ा. अखिलेश यादव युवा हैं और उनको राज्य में मात देने के लिए युवा चेहरे की तलाश है. लेकिन कांग्रेस के पास समाजवादी पार्टी जैसा संगठन नहीं है. पांच साल सीएम के तौर पर अखिलेश यादव ने प्रशासनिक लेवल पर अपने आप को साबित भी किया. हालांकि, 2017 के चुनाव में बीजेपी की ऐसी आंधी थी जिसमें कोई भी टिक नहीं पाया.

सेक्रेटरी जनरल बनाने की हो रही है बात

वरुण गांधी को कांग्रेस में सुपर जनरल सेक्रेटरी बनाया जा सकता है. जिसके लिए सेक्रेटरी जनरल का नया पद बनाया जाएगा. जो बाकी महासचिव और प्रभारियों से ऊपर होगा. कांग्रेस मे सेक्रेटरी जनरल का पद नहीं है. ना ही उपाध्यक्ष का पद था. कांग्रेस के 18-19 जनवरी 2013 के जयपुर अधिवेशन में मांग उठी कि राहुल गांधी को बड़ी जिम्मेदारी दी जाए तो ये पद बनाया गया था. राहुल गांधी से पहले अर्जुन सिंह पार्टी के उपाध्यक्ष तब थे जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने. इसलिए पार्टी का काम-काज चलाने के लिए अर्जुन सिंह को नंबर 2 की हैसियत दी गई थी. वरुण गांधी के लिए भी बकायदा कांग्रेस के संविधान में बदलाव किया जाएगा. कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इस पद को बनाने के लिए प्रस्ताव पास कराया जाएगा.

Priyanka Gandhi

चुनाव प्रचार के दौरान समोधा गांव में प्रियंका गांधी

प्रियंका-वरुण के बीच नजदीकी

सोनिया गांधी और मेनका गांधी के बीच रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहे है. लेकिन प्रियंका और वरुण गांधी के बीच रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं. वरुण गांधी और प्रियंका लगातार मिलते रहे हैं. दोनों परिवार इस बात का ख्याल करते रहे कि एक दूसरे के खिलाफ नहीं बोले. वरुण गांधी खुद 16 फरवरी 2011 को 10 जनपथ गए और अपनी शादी के लिए न्योता दिया. लेकिन मार्च में हुई शादी में सोनिया गांधी के परिवार से कोई नहीं पहुंचा.

हालांकि, जब वरूण गांधी ने सुल्तानपुर से 2014 में पर्चा भरा तब प्रियंका गांधी ने वरुण गांधी की आलोचना की थी. प्रियंका गांधी ने कहा था कि ये विचारों की लड़ाई है और वरुण ने गांधी परिवार के साथ गद्दारी की है. वरूण गांधी ने भी पलटवार किया कि प्रियंका गांधी शिष्टाचार की सीमा लांघ रही हैं. लेकिन इसके बाद दोनों लोगों में मुलाकात का सिलसिला बंद नहीं हुआ. वरुण गांधी के जब आपत्तिजनक फोटो सार्वजनिक हुए तब भी कांग्रेस ने चुप्पी साधे रखी.

वरुण की राजनीति

बीजेपी की राजनीति में वरुण गांधी सितारे के तौर पर चमके. 2009 में वरुण पीलीभीत से लोकसभा के सांसद बने. बीजेपी में उनको राहुल गांधी के काट के तौर देखा गया. बीजेपी ने वरुण गांधी को पार्टी का महासचिव बनाया. लेकिन वरूण गांधी को उम्मीद थी कि 2014 को चुनाव के बाद उनको कोई अहम पद मिलेगा. लेकिन उनकी मां मेनका गांधी को केन्द्रीय कैबिनेट में जगह मिली.

वरूण गांधी ने इसके बाद यूपी चुनाव से पहले पूरे राज्य में बीजेपी के नेता के तौर पर अपने आपको प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया. ये बीजेपी को नागवार गुजरा जिसके बाद पार्टी की तरफ से कहा गया कि अपने आप को इस तरह प्रोजेक्ट ना करे. तभी से वरूण गांधी और बीजेपी के बीच दूरियां बढ़ीं. बीजेपी ने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में वरूण को कोई खास तवज्जो नहीं दी. जिसके बाद वरूण गांधी की नाराजगी पार्टी को लेकर बढ़ गई. जहां यूपी में बीजेपी की सरकार है वहां वरुण गांधी हाशिए पर हैं. पार्टी में उनकी पूछ कम है क्योंकि बीजेपी के अध्यक्ष के साथ उनके रिश्ते बहुत अच्छे नहीं है.

Varun-Gandhi

वरुण की राजनीति में दस्तक

2004 के आम चुनाव से पहले बीजेपी के कद्दावर नेता वरुण गांधी बीजेपी में आए थे. उनको बीजेपी में लाने की भूमिका बनाई उस वक्त के कद्दावर नेता प्रमोद महाजन ने. प्रमोद महाजन ने सबसे पहले वरुण गांधी की सार्वजनिक तौर पर तारीफ शुरू की. मीडिया को भी ये बताया गया कि वरुण किस तरह से राहुल गांधी से ज्यादा सक्षम हैं. वरुण के नॉलेज और उनके कविता रचने की बात भी बताई जाने लगी. लेकिन 2004 का चुनाव वरुण गांधी नहीं लड़ पाए. उस वक्त वरुण की उम्र कम थी. लेकिन वरुण ने बीजेपी के लिए प्रचार किया. वरुण ने पहली बार 1999 में पीलीभीत में अपनी मां मेनका गांधी के लिए प्रचार किया और राजनीति में आने की दस्तक दी.

वरुण-मेनका के कांग्रेस से रिश्ते

मेनका गांधी इंदिरा गांधी से मतभेदों के चलते अलग हो गईं.1983 में मेनका गांधी ने संजय विचार मंच बनाया. जिसके बाद चुनाव भी लड़ीं लेकिन उनकी पार्टी को कोई कामयाबी नहीं मिली. 1984 में राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ीं लेकिन हार गईं.1988 में वीपी सिंह के जनता दल में शामिल हुईं और केंद्र में 1989 में मंत्री बनीं. 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री बनीं. लेकिन बाद में मेनका गांधी को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया. अंदर खाने ये बात होने लगी कि सोनिया गांधी के हस्तक्षेप की वजह से उनको मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा.