आजम खान की मुश्किलें बढीं, जौहर यूनिवर्सिटी की हो सकती है सीबीआई जांच

पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार में कद्दावर मंत्री रहे आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद मंत्री पद तो गया ही, अब सीबीआई जांच की तलवार भी लटकने लगी है.

दरअसल सूबे की योगी सरकार जौहर विश्वविद्यालय की लीज़ पर ली गई जमीनों की जांच सीबीआई से करा सकती है. अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलाख ने ईटीवी/न्यूज़18 से खास बातचीत में इस बात का जिक्र किया.

उन्होने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है. उन्होंने कहा कि इस यूनिवर्सिटी के लिए अलग-अलग विभाग बिल्डिंग बनवाता था जो बाद में 100 रु महीने की लीज़ पर जौहर ट्रस्ट में चली जाती थी. औलाख ने कहा कि अब आजम खान से पाई-पाई का हिसाब लिया जाएगा.

बता दें जौहर यूनिवर्सिटी को लीज पर दी गई जमीन को अल्पसंख्यक, वक्फ और अन्य सरकारी विभागों की हैं. आरोप है कि इन जमीनों को अफसरों से जबरन लिया गया. अब योगी सरकार इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं.


अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री औलाख ने बताया कि यह बहुत ही गंभीर विषय है. शोध संस्थान 30 करोड़ की लागत से जेल की जगह पर बनाया गया है. और उसके बनने के बाद जौहर ट्रस्ट ने उसे 100 रुपए महीने के लीज पर ले लिया. इतना ही नहीं जौहर यूनिवर्सिटी में अलग-अलग बिल्डिंग का निर्माण सर्कार की तरफ से बनायी गईं और फिर उन्हें जौहर ट्रस्ट को सौंप दिया गया.

औलाख ने बताया कि बिल्डिंग का निर्माण सरकार के पैसे होता था और उसके बाद उसे जौहर ट्रस्ट के नाम 100 रुपए महीने की लीज पर ट्रान्सफर कर दिया जाता था. सरकार और जनता के हजारों करोड़ रुपयों को जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में खर्च किया गया.

मंत्री ने कहा, “यूनिवर्सिटी का गेस्ट हाउस पीडब्लूडी की तरफ से बनाया गया. इसमें 200 करोड़ से ज्यादा खर्चा हुआ. गेस्ट हाउस तक के लिए आरसीसी की रोड का निर्माण भी विभाग द्वारा 1300 से ज्यादा करोड़ में बनाया गया. टेंट भी बनाया गया है जो गांव की जमीन है लेकिन अब ट्रस्ट में शामिल हो गया. मेडिकल कॉलेज भी सरकार के पैसे से बन रहा है.”

औलाख ने कहा कि यह बहुत बड़ा घोटाला है. इसकी जांच कराई जा रही है. मुख्यमंत्री जी के संज्ञान में इस बात को डाल दी गई है. सभी रिपोर्ट आने के बाद इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश की जाएगी.

मंत्री ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी को पूर्व मंत्री ने ऐश-ओ-आराम के लिए बनवाया है न कि स्टूडेंट्स के लिए. अब सरकार उनसे एक-एक पाई का हिसाब लेगी.

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