योगी सरकार में निर्माण कार्य प्रभावित होने से बढ़ी बेरोजगारी,आई लूट और छिनैती की बाढ़

यूपी में सत्ता परिवर्तन के मन में एक ईमानदार और उर्जावान सरकार की परिकल्पना जागी थी।आज बीजेपी सरकार गठन के दो माह से अधिक का समय बित गई उसके बाद भी खनन को लेकर सरकार की स्पष्ट निति तय नही कर पाने से लोगो के आशियाना बनाने का सपना टूटता जा रहा है।आसमान छूती मौरंग , गिट्टी और बालू बाजार से गायब है जो आम आदमी के पहुच से बाहर होने से लोगो में सरकार के प्रति गुस्सा बढती जा रही है।निर्माण कार्य ठप होने से बेरोजगारी बढ़ी है।हाल-फिलहाल जो लूट और छिनैती की घटनाए बढने का मुख्य कारण बढती बेरोजगारी है।

कृषि के बाद, निर्माण उद्योग भारत का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग है। यह उद्योग भारत के सकल घरेलू उत्पाद का आठ प्रतिशत हिस्सा है क्योंकि यह हर साल लगभग 40 मिलियन लोगों को काम पर रखने और नए नौकरियों का सृजन करके रोजगार का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निर्माता है।विगत महीनों में जिसतरह विकास को छोडकर सरकार विफ़ की राजनीति में दिलचस्पी बढाइ है उससे जनमानस में उदासीनता और एक दुसरे समुदाय के प्रति आक्रोश बढा है ।सरकार का ध्यान बेरोजगारों को रोजगार मिले उसकी तरफ नही होने से प्रदेश में चोरो,डकैती,छिनैती और अपराध की घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।निर्माण उद्योग प्रभावित होने में खनन के प्रति सरकार की नीति स्पष्ट नही होने से हुआ है। आसमान छूती मौरंग की कीमते लोगो को आशियाना बनाने से रोक दिया है।जिसके चलते दिहाड़ी मजदूर के सामने भूखमरी की समस्या आ गई है।

ढुलाई न होने से ट्रक और ट्रैक्टर चालक परेशान
एमपी में बहने वाली सिंधु नदी से मौरंग का खनन बंद होने से इसका सीधा असर उप्र के सीमावर्ती जिलों पर पड़ रहा है। मौरंग के अभाव में इटावा के अधिकतर सरकारी व गैर सरकारी निर्माण कार्य बंद हो गए हैं। मौरंग की ढुलाई में लगे सैकड़ों ट्रैक्टर और ट्रक चालक बेरोजगार हो गए हैं।
चकरनगर क्षेत्र में कृषि योग्य भूमि कम होने के बाद भी ट्रैक्टरों की संख्या काफी है। यहां का किसान खेती करने के साथ एमपी से आने वाली बालू की ढुलाई करके परिवार चलाता है। इस क्षेत्र में उप्र की सीमा में कहीं भी मौरंग का खनन नहीं होता है। एमपी के भिंड जनपद में कई खदानें संचालित थीं। जिनसे उप्र के वाहन रायल्टी जमा कर बालू का परिवहन करते थे। प्रदेश में नई सरकार बनने के साथ ही पुलिस ने अवैध परिवहन करने वाले वाहनों को सीज कर दिया था। राष्ट्रीय प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह यादव उर्फ झब्बू यादव का कहना है कि अवैध खनन पर रोक जायज है लेकिन निर्माण कार्य के लिए मौरंग की उपलब्धता आवश्यक है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि विकास कार्य अवरुद्ध न हों, इसके लिए वैध रूप से मौरंग खनन की व्यवस्था की जाए।

उद्योग को तीन भागो  में विभाजित किया जा सकता है जो रियल एस्टेट क्षेत्र की तरह हैं – आवासीय और वाणिज्यिक निर्माण; बुनियादी ढांचा निर्माण – सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डे, बिजली, आदि शामिल हैं; और औद्योगिक – जिसमें रिफाइनरियों, कपड़ा, पाइपलाइन आदि शामिल हैं। रियल एस्टेट निर्माण उद्योग को तेजी से और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन रियल एस्टेट क्षेत्र में लंबे समय तक मंदी की वजह से, निर्माण उद्योग सुस्त दिख रहा है मंदी के कारण भारत भर में इन्वेंट्री भी बढ़ी है। इसके अलावा पढ़ें: खरीदारों के आँख परियोजनाओं के निर्माण के उन्नत चरणों में इन तीन विभिन्न क्षेत्रों में शामिल निर्माण गतिविधि काफी हद तक अलग है। 75 प्रतिशत के लिए आवासीय आवास का निर्माण; सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों और बंदरगाहों का निर्माण 40 प्रतिशत और 60 प्रतिशत के बीच हुआ। और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए, निर्माण गतिविधि 15 से 20 प्रतिशत के बीच होती है इस क्षेत्र में प्रमुख बाधाएं एक और पहलू है जो इस क्षेत्र से मुकाबला कर रहा है, जिसमें चल रहे विवाद हैं, जहां पार्टियां इन विवादों को शीघ्रता से और प्रभावी ढंग से सुलझाने में नाकाम रही हैं। यह अनुमान लगाया गया है कि मध्यस्थता में लगभग 70,000 करोड़ रुपये का निवेश जुड़ा हुआ है चूंकि निर्माण उद्योग भारत की रीढ़ है, इसलिए जरूरी और प्रभावी सुधारों की आवश्यकता है। विवादों की लतता के संबंध में, सरकारी संस्थाओं और सार्वजनिक क्षेत्र इकाइयों (पीएसयू) के खिलाफ उठाए गए कुल दावों का 64 प्रतिशत मध्यस्थता में लंबित हैं और 11 प्रतिशत अभी भी सरकारी इकाइयों के पास लंबित हैं। भारत में, विवादों के निपटारे के लिए औसत अवधि सात वर्ष से अधिक है। इसलिए, निर्माण उद्योग की वसूली विकास और आर्थिक गतिविधि की मौजूदा दर को प्रेरित करने और बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यह भी पढ़ें: निर्माण और गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के लिए 7 तरीके कई अन्य कारक हैं जो निर्माण उद्योग की वृद्धि को परेशान करते हैं कुशल कर्मचारियों की कमी, निर्माण रेत की कमी, कच्ची सामग्री और राजनीतिक गड़बड़ी, सबसे बड़ी बाधाएं हैं। जो गति वर्तमान में कार्य कर रही है, वह भविष्य को दर्शाती नहीं है कि भविष्य में उसके पास क्या भंडार है। प्रमुख चालकों उद्योग में प्रौद्योगिकी की उन्नति गति और संभावित वृद्धि कर सकती है और विकास तत्व के रूप में कार्य करेगी।