भ्रष्टाचार पर बड़ा खुलासा इंजीनियर की पगार 60 हजार, मिला 600 करोड़ का कालाधन,

14_12_2016-income_taxयूपी और उत्तराखंड में निजाम बदलते ही आयकर विभाग दो दिनों से ताबड़तोड़ छापेमारी करके काले कुबेरों का खुलासा किया है । आयकर विभाग ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पिछले दो दिनों में सरकारी और पीएसयू कंपनियों के चार अधिकारियों के 20 परिसरों पर छापे मारे हैं। सपा और काग्रेस सरकार में इनकम टैक्स विभाग को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नही करा पाने से ज भी विभाग की छापेमारी धड़ल्ले से जारी है। सुबह-सुबह खबर आई कि नोएडा ऑथोरिटी पूर्व ओएसडी वाईपी त्यागी के ठिकानों पर भी छापेमारी हुई है। उनके 4 ठिकानों पर छापेमारी हुई है। इससे पहले राजकीय निर्माण निगम के एडिशनल जनरल मैनेजर शिव आश्रय शर्मा के पास 600 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ है।

आयकर विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि यूपी राज्य निर्माण निगम के देहरादून इकाई महाप्रबंधक शिव आश्रय शर्मा ने पद का दुरुपयोग कर 600 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति खड़ी की है। जीएम ने अपने चहेते ठेकेदारों के जरिए हुई कमाई से अचल संपत्तियां अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदीं। आयकर विभाग ने मंगलवार सुबह देहरादून में जीएम, उनके चहेते ठेकेदार अमित शर्मा और एक न्यूज चैनल के आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। आयकर की जांच बुधवार को भी जारी रही। आयकर अधिकारियों की जांच में यह तथ्य सामने आ रहे हैं कि गलत तरीके से कमाए धन से ऐशोआराम की जिंदगी जीता था। जीएम ने देहरादून में 100 एकड़ के फार्महाउस के अलावा कई अन्य शहरों में बड़ी जमीनें खरीद रखी हैं। उसके परिवार के सदस्यों के पास रेंजरोवर, ऑडी, बीएमडब्लू जैसी लग्जरी गाड़ियां मिली हैं।

यही नहीं परिवार के सदस्य अक्सर छुटि्टयों में विदेश जाया करते थे। आयकर अधिकारियों को ऐसे रिकार्ड मिले हैं। फार्म हाउस में छापेमारी के दौरान अधिकारियों को महंगे से महंगे सामान और सुविधाएं लगी मिलीं। पांच लाख रुपए तक की महंगी 15 एलईडी और विभिन्न कंपनियों के महंगे फर्नीचर वहां थे।

2015 में जीएम ने अपने बेटे के नाम से देहरादून के पास औद्योगिक क्षेत्र में पांच बीघा जमीन खरीदा लेकिन इसके कागज नहीं दिखा सका। वहां 1500 स्क्वायर फीट में एक अत्याधुनिक जिम बना हुआ मिला। जबकि गेस्ट हाउस और स्वीमिंग पूल का निर्माण जारी है। इन सब के लिए हुए खर्च का कोई रिकार्ड वह नहीं दिखा सके। यही नहीं एक एनआरआई से 10.50 करोड़ रुपए में साठ बीघा का फार्म हाउस खरीदने की कवायद चल रही थी। यह खरीद नहीं हो पायी लेकिन इसके लिए भारी रकम एडवांस में दिए गए और इसे वापस भी नहीं लिया गया।