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आईडीएस के तहत लगने वाले टैक्स की पहली खेंप में जमा हुए 6,700 करोड़ रुपए

नई दिल्ली: केंद्र सरकार की इनकम डिक्लेरेशन स्कीम (आय घोषणा योजना) के तहत कालेधन के खुलासे की पहली किश्त में टैक्स के रुप में 6,700 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। सरकार की इस स्कीम के तहत बनाई गई अनुपालन खिड़की चार महीने तक (जून से 30 सितंबर) खुली रही थी। सरकार यह योजना इसलिए लाई थी ताकि लोग अपनी अघोषित संपत्ति का खुलासा करें ताकि वो सरकार की तरफ से होने वाली कार्यवाही से बच पाएं।16_12_2016-ids

अगले साल तक 30,000 करोड़ से जो टैक्स आने का अनुमान है वो डिस्क्लोजर की संख्या कम होने की आशंका के कारण कम हो सकती है। इस अनुमान में 5,000 करोड़ रुपए की कमी हो सकती है। आयकर विभाग ने कुछ मामलों में 100 फीसदी का कर प्राप्त किया है, लेकिन अंतिम आंकड़ा इससे कुछ अलग हो सकता है क्योंकि कुछ डिस्क्लोजर (घोषणाएं) फर्जी पाए गए हैं।

सरकार ने अघोषित आय का खुलासा करने को दिया था चार महीने का वक्त:
सरकार ने अघोषित आय का खुलासा करने के लिए लोगों को चार महीने का वक्त दिया था। अनुपालन खिड़की जून से सितंबर महीने तक खुली रही थी जिसके जरिए 67,000 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति का खुलासा हुआ। कुल खुलासा राशि पर 45 फीसदी का जुर्माना और कर (सरचार्ज और सेस समेत) के माध्यम से सरकार को 30,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी।

लोगों को तीन किश्तों में करना है अघोषित आय का खुलासा:
खुलासे के तहत सामने आने वाली रकम पहली किश्त के अनुमान के मुताबिक कम है। सरकार ने लोगों को सुविधा दी है कि वो तीन किश्तों में अपनी अघोषित आय का खुलासा करें। पहली किश्त नवंबर महीने तक 25 फीसदी, फिर मार्च महीने में 25 फीसदी और फिर सितंबर 2017 की आखिरी किश्त मे 50 फीसदी आय का खुलासा करना है।